Maruti Suzuki  Omni :भारत की सबसे यादगार “फैमिली वैन” जिसने लाखों दिल जीते

Maruti Suzuki Omni :भारत की सबसे यादगार “फैमिली वैन” जिसने लाखों दिल जीते

November 21, 2025
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21 November 2025. By-Kaushik

मारुति सुजुकी ओम्नी भारत की सड़कों पर 1984 से 2019 तक लगभग 35 साल तक राज करने वाली एक आइकॉनिक गाड़ी रही। सादगी, किफायती कीमत, कम मेंटेनेंस और ढेर सारा स्पेस – यही वो खूबियाँ थीं जिन्होंने इसे आम भारतीय की पहली पसंद बना दिया। आज भले ही ये बंद हो चुकी हो, लेकिन इसके किस्से आज भी लोगों की जुबान पर हैं। आइए इस लेजेंड्री वैन को याद करते हैं।

  1. शुरुआत की कहानी – कैसे आई मारुति ओम्नी भारत में?
    1984 में मारुति 800 के साथ-साथ मारुति ओम्नी भी लॉन्च हुई थी। दरअसल ये सुजुकी कैरी वैन का बैज-इंजीनियर्ड वर्जन थी। उस दौर में भारत में 8-सीटर किफायती वाहन का कोई विकल्प नहीं था। स्कूल वैन, टैक्सी, एम्बुलेंस, माल ढोने का काम, फैमिली ट्रिप – ओम्नी हर काम आती थी। पहली पीढ़ी में 796cc का 3-सिलेंडर इंजन था जो सिर्फ 34 bhp देता था, लेकिन भरोसेमंद था।
  2. डिज़ाइन और स्पेस – “लोहे का डब्बा” जिसके अंदर महल सा लगता था
    ओम्नी का बॉक्सी डिज़ाइन देखकर लोग मजाक उड़ाते थे कि ये तो “ब्रेड लोफ” जैसी लगती है, लेकिन यही डिज़ाइन इसे प्रैक्टिकल बनाता था। ऊंची छत, स्लाइडिंग दरवाजे, फ्लैट फ्लोर और 8 लोगों के बैठने की जगह – बड़े-बड़े MPV भी शर्मा जाएँ। पीछे की सीटें हटा दो तो छोटी दुकान खोल लो, सामान भर लो, कुछ भी कर लो। आज की गाड़ियों में जो स्पेस मिलता है, उसकी नींव ओम्नी ने रखी थी।
  3. परफॉर्मेंस और मेंटेनेंस – कम खर्च, ज्यादा चलन
    796cc का इंजन, सिर्फ 800 किलो वजन, 4-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स – स्पीड में कोई दम नहीं था, टॉप स्पीड मुश्किल से 100-110 km/h। लेकिन यही हल्कापन इसे शानदार माइलेज देता था – 15-18 km/l पेट्रोल पर आसानी से। स्पेयर पार्ट्स हर गली में मिलते थे, मैकेनिक आँख बंद करके खोल-बंद कर देता था। 50-60 पैसे प्रति किलोमीटर का खर्च – आज भी कोई गाड़ी ये दाम नहीं दे सकती।
  4. ओम्नी के विवाद और आखिरी सफर
    2010 के बाद सेफ्टी नॉर्म्स सख्त हुए। ओम्नी में न तो एयरबैग थे, न ABS, न क्रैश टेस्ट पास करने लायक बॉडी। 2019 में BS6 नॉर्म्स आने के साथ मारुति ने इसे बंद करने का फैसला लिया। आखिरी ओम्नी अप्रैल 2019 में फैक्ट्री से निकली। स्कूल वैन, टूरिस्ट टैक्सी और छोटे व्यापारियों ने सबसे ज्यादा रोया क्योंकि इसके बाद Eeco आई जो थोड़ी महँगी और कम स्पेशियस थी।
  5. आज भी क्यों याद आती है मारुति ओम्नी?
  6. आज सेकंड-हैंड मार्केट में 50,000 से 1.5 लाख रुपये में ओम्नी मिल जाती है। गाँव-कस्बों में आज भी हजारों ओम्नी चल रही हैं। ये सिर्फ एक गाड़ी नहीं थी, ये एक भावना थी – “चलेगी… टेंशन मत लो” वाली भावना। नया ज़माना आ गया, लग्जरी MPV आ गईं, लेकिन ओम्नी जैसी सादगी, मजबूती और किफायतीपन वाली गाड़ी शायद दोबारा नहीं बनेगी।
  7. मारुति ओम्नी चली गई, लेकिन इसने जो यादें छोड़ी हैं, वो आजीवन रहेंगी। आपकी पहली ओम्नी की याद क्या है? कमेंट में जरूर बताइए! 🚐❤️

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