1 जनवरी 2026 से महंगी हो रही हैं मर्सिडीज-बेंज कारें: जानें पूरी डिटेल्स

1 जनवरी 2026 से महंगी हो रही हैं मर्सिडीज-बेंज कारें: जानें पूरी डिटेल्स

December 15, 2025
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15, December 2025. By -Kaushik

नया साल 2026 आने वाला है और इसके साथ ही कार खरीदने वालों के लिए एक बुरी खबर भी। अगर आप लग्जरी कारों के शौकीन हैं और मर्सिडीज-बेंज की कोई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो जल्दी करें क्योंकि 1 जनवरी 2026 से सभी मर्सिडीज मॉडल्स महंगे हो जाएंगे। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि कीमतों में 2% तक की बढ़ोतरी होगी। इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि क्यों हो रही है यह बढ़ोतरी, कितना असर पड़ेगा और क्या करें अगर आप कार बुक करना चाहते हैं। चलिए शुरू करते हैं!
क्यों बढ़ रही हैं मर्सिडीज-बेंज कारों की कीमतें?
मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने साफ कहा है कि यह प्राइस हाइक मजबूरी में किया जा रहा है। मुख्य कारण हैं:
मुद्रा दबाव (फॉरेक्स प्रेशर): साल 2025 भर यूरो की कीमत भारतीय रुपये के मुकाबले 100 रुपये से ऊपर रही। इससे इंपोर्टेड पार्ट्स और पूरी तरह आयातित कारों (CBU) की लागत बहुत बढ़ गई है।
ऑपरेशनल कॉस्ट में बढ़ोतरी: इनपुट कॉस्ट, कमोडिटी प्राइस, लॉजिस्टिक्स खर्च और महंगाई के कारण कंपनी का कुल खर्च बढ़ गया है।
लोकल असेंबली पर भी असर: पुणे प्लांट में असेंबल होने वाली कारें जैसे C-Class, GLC, E-Class LWB आदि भी महंगी होंगी क्योंकि इनमें यूरोप से आने वाले पार्ट्स इस्तेमाल होते हैं।
कंपनी के MD और CEO संतोष अय्यर ने कहा कि कंपनी ज्यादातर कॉस्ट खुद absorb कर रही है, लेकिन कुछ हिस्सा कस्टमर्स तक पहुंचाना जरूरी है ताकि बिजनेस सस्टेनेबल रहे। अच्छी बात यह है कि बढ़ोतरी सिर्फ 2% तक कैप की गई है, जो लग्जरी सेगमेंट में काफी कम है।

कितनी बढ़ेंगी कीमतें और कौन से मॉडल प्रभावित होंगे?
यह बढ़ोतरी सभी मॉडल्स पर लागू होगी – सेडान, SUV, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और AMG परफॉर्मेंस मॉडल्स समेत। बढ़ोतरी मॉडल के आधार पर अलग-अलग होगी:
पूर्ण आयातित कारें (CBU): इन पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि ये पूरी तरह विदेश से आती हैं।
लोकली असेंबल्ड मॉडल्स: जैसे A-Class Limousine, GLA, GLE, S-Class, EQS आदि – इनमें इंपोर्टेड कंपोनेंट्स की वजह से भी प्राइस बढ़ेगा।
उदाहरण के तौर पर:
अगर कोई मॉडल अभी 50 लाख का है, तो 2% बढ़ोतरी से करीब 1 लाख रुपये महंगा हो सकता है।
हाई-एंड मॉडल्स जैसे Maybach या AMG पर लाखों का अंतर आ सकता है।
सटीक नई प्राइस लिस्ट कंपनी 1 जनवरी से जारी करेगी, लेकिन एक्स-शोरूम प्राइस पर यह बदलाव सभी डिलीवरी पर लागू होगा।
कस्टमर्स के लिए राहत की खबरें
मर्सिडीज अच्छे से जानती है कि प्राइस हाइक से कस्टमर्स पर बोझ पड़ता है। इसलिए कुछ राहत भी दे रही है:
फाइनेंसिंग बेनिफिट्स: RBI की रेपो रेट कटौती की वजह से Mercedes-Benz Financial Services (MBFS) से लोन पर बेहतर डील मिल रही है। कंपनी के अनुसार, 50% सेल्स MBFS से होती है और 80% कस्टमर्स फाइनेंसिंग लेते हैं। इससे EMI पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
लोकलाइजेशन स्ट्रेटजी: कंपनी भारत में ज्यादा से ज्यादा पार्ट्स लोकल बना रही है, जिससे भविष्य में कॉस्ट कंट्रोल हो सके।
अगर आप 2025 के अंत तक बुकिंग कर लेते हैं और डिलीवरी जनवरी से पहले हो जाती है, तो पुरानी कीमत पर कार मिल सकती है। डीलर से कन्फर्म करें!
अन्य कार कंपनियों का क्या हाल?
हालांकि इस बार मुख्य ऐलान मर्सिडीज का है, लेकिन ऑटो इंडस्ट्री में जनवरी से प्राइस हाइक आम ट्रेंड है। पिछले सालों में मारुति, हुंडई, टाटा, महिंद्रा आदि ने भी बढ़ोतरी की थी। 2026 में कमोडिटी और फ्रेट कॉस्ट बढ़ने की आशंका है, तो हो सकता है अन्य कंपनियां भी फॉलो करें। लेकिन फिलहाल मर्सिडीज ने सबसे पहले और साफ घोषणा की है।
अंत में: क्या करें आप?
अगर आप मर्सिडीज की कोई कार जैसे GLC, E-Class या EQS खरीदने का सोच रहे हैं, तो दिसंबर में ही डीलर से बात करें। टेस्ट ड्राइव लें, बुकिंग करें और पुरानी कीमत का फायदा उठाएं। नया साल नई कार के साथ मनाएं, लेकिन स्मार्ट तरीके से!

डिस्क्लेमर:
इस लेख में दी गई ऑटो से जुड़ी जानकारी विभिन्न ऑनलाइन स्रोतों व आधिकारिक वेबसाइट पर आधारित है। वाहन की कीमत, फीचर्स और स्पेसिफिकेशन समय के साथ बदल सकते हैं। खरीदारी से पहले कृपया कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी डीलरशिप से जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।

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